पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार, 3 मार्च को अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और वॉल स्ट्रीट में भारी बिकवाली शुरू हो गई।
वॉल स्ट्रीट में मची अफरा-तफरी
अमेरिकी बाजार के तीनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 1247 अंक यानी लगभग 2.5% टूट गया। वहीं S&P 500 करीब 2.4% नीचे आ गया और टेक कंपनियों वाला नैस्डैक इंडेक्स भी लगभग 2.5% गिर गया।
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों को डर है कि अगर पश्चिम एशिया का यह टकराव लंबा चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में तेज उछाल
इस तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 8% से ज्यादा की तेजी देखी गई। कारण यह है कि ट्रेडर्स को आशंका है कि पश्चिम एशिया के अहम समुद्री रास्तों से तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
तेल महंगा होने का असर सीधे महंगाई पर पड़ता है और यही वजह है कि निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
सोना-चांदी में भी उतार-चढ़ाव
तनाव के समय आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार लगातार तेजी के बाद सोने में 3% से ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं चांदी में तो और बड़ी गिरावट आई और कीमतें करीब 10% तक फिसल गईं।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली की वजह से आई।
ट्रंप के बयान से बढ़ी बेचैनी
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर जमीनी सैनिक भी तैनात कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संघर्ष कई हफ्तों तक चल सकता है।
इस बयान के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ गई कि अमेरिका की भागीदारी और गहरी हो सकती है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल का असर भारत पर भी पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा। इससे महंगाई और रुपये पर भी असर पड़ सकता है।
इसके अलावा विदेशी निवेशक जोखिम से बचने के लिए उभरते बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक ईरान की अगली प्रतिक्रिया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे माहौल में जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचना चाहिए और बाजार के रुख को समझकर ही कदम उठाना बेहतर होता है।
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Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

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