भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 4 मार्च को कारोबार शुरू होते ही जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 1700 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 500 से ज्यादा अंक गिरकर 24,400 के नीचे फिसल गया। इस अचानक आई गिरावट से बाजार में बेचैनी का माहौल बन गया। कुछ ही मिनटों के भीतर निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति घट गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी तेज़ी से कम हो गया। बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी दबाव दिखा और इन इंडेक्सों में लगभग 2 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई।
बाजार आखिर क्यों गिरा?
1. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में हालात तेजी से बिगड़े हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया भर के बाजारों को अस्थिर कर दिया है।निवेशकों को डर है कि अगर यह टकराव लंबा चलता है तो तेल सप्लाई और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार में जोखिम लेने की बजाय निवेशक सावधानी बरत रहे हैं।
2. दुनिया के बाजारों से मिले कमजोर संकेत
भारतीय बाजार पर वैश्विक बाजारों का असर साफ दिखाई दिया। एशिया के कई बड़े बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में कमजोरी रही। वहीं अमेरिका के बाजार भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऐसे माहौल में भारतीय बाजार में भी बिकवाली बढ़ गई।
3. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
तेल की बढ़ती कीमतें भी बाजार के लिए चिंता का कारण बन गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर के आसपास पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए तेल महंगा होने का असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों के खर्च पर पड़ सकता है।
4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी निवेशक पिछले कई महीनों से भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। हाल के कारोबार में भी उन्होंने बड़ी मात्रा में शेयर बेचे। जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं तो बाजार में दबाव बढ़ जाता है और इससे गिरावट तेज हो सकती है।
5. बाजार में बढ़ी घबराहट
शेयर बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX इंडेक्स भी तेजी से ऊपर गया है। इसका मतलब है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और डर बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में अक्सर निवेशक जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश घटाने लगते हैं, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ जाता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात, तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। ऐसे समय में निवेशकों को घबराने के बजाय सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।
Read Also : अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: वॉल स्ट्रीट 1200 अंक से ज्यादा टूटा, भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

मेरा नाम अंकित कुमार अवस्थी है। पिछले 5 वर्षों से मैं लगातार फाइनेंस सेक्टर को समझने और उसमें अपनी जानकारी बढ़ाने पर काम कर रहा हूँ। इस दौरान मैंने शेयर बाजार, निवेश और वित्तीय विषयों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सीखीं और उन्हें गहराई से समझने का प्रयास किया।
मेरा उद्देश्य है कि जो भी ज्ञान और अनुभव मैंने इन वर्षों में हासिल किया है, उसे सरल और भरोसेमंद तरीके से आप सभी तक पहुँचाऊँ। इसलिए मैं अपने कंटेंट के माध्यम से फाइनेंस और निवेश से जुड़ी जानकारी आसान भाषा में साझा करता हूँ, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सही जानकारी के आधार पर बेहतर वित्तीय फैसले ले सकें।


