सरकार के विनिवेश संकेत ने भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC के स्टॉक में अचानक हलचल बढ़ा दी है। मजबूत तिमाही नतीजों और आकर्षक डिविडेंड के बावजूद निवेशकों ने शेयर में मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसके चलते LIC का शेयर करीब 3 प्रतिशत टूटकर 830 रुपये के आसपास बंद हुआ।
अब बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ अस्थायी दबाव है या फिर शेयर में और गिरावट देखने को मिल सकती है? टेक्निकल चार्ट और बाजार विशेषज्ञों की राय फिलहाल कुछ अहम स्तरों की तरफ इशारा कर रही है।
सरकार की हिस्सेदारी बिक्री ने क्यों बढ़ाया दबाव?
LIC में फिलहाल केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 96 प्रतिशत से ज्यादा है। बाजार नियामक नियमों के मुताबिक कंपनियों में न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखना जरूरी होता है। इसी वजह से सरकार अब LIC में करीब 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है।
बाजार में चर्चा है कि इस विनिवेश के जरिए सरकार करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है। हालांकि निवेशकों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ी कि संभावित OFS (Offer For Sale) डिस्काउंट पर आ सकता है। आमतौर पर OFS में शेयर बाजार भाव से कम कीमत पर ऑफर किए जाते हैं ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।
यही कारण रहा कि खबर सामने आते ही कई निवेशकों ने शॉर्ट टर्म प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी।
फंडामेंटल मजबूत, लेकिन सेंटीमेंट कमजोर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट कंपनी के बिजनेस प्रदर्शन की वजह से नहीं आई है। हाल ही में LIC ने मजबूत चौथी तिमाही के नतीजे पेश किए थे और निवेशकों के लिए बोनस व डिविडेंड का भी ऐलान किया था।
विश्लेषकों के मुताबिक कंपनी की बैलेंस शीट, प्रीमियम ग्रोथ और निवेश पोर्टफोलियो अभी भी मजबूत स्थिति में हैं। लेकिन जब तक OFS से जुड़ी कीमत और टाइमलाइन साफ नहीं होती, तब तक शेयर पर दबाव बना रह सकता है।
यानी फिलहाल कहानी “फंडामेंटल्स बनाम सेंटीमेंट” की बन गई है।
अब कौन-से लेवल सबसे अहम?
टेक्निकल चार्ट पर LIC का शेयर फिलहाल एक महत्वपूर्ण जोन में ट्रेड कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक 850 रुपये का स्तर स्टॉक के लिए मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है।
कहा जा रहा है कि जब तक शेयर 850 रुपये के ऊपर साप्ताहिक क्लोजिंग नहीं देता, तब तक इसमें मजबूत तेजी की वापसी मुश्किल रह सकती है।
दूसरी तरफ 820 रुपये का स्तर बेहद अहम सपोर्ट माना जा रहा है। अगर शेयर इसके नीचे फिसलता है, तो फिर 790 से 770 रुपये तक कमजोरी बढ़ सकती है।
निकट अवधि में शेयर के 800 से 850 रुपये की रेंज में कारोबार करने की संभावना जताई जा रही है।
निवेशकों को क्या रणनीति रखनी चाहिए?
विशेषज्ञों की राय है कि नई खरीदारी करने वाले निवेशकों को थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। बाजार फिलहाल OFS से जुड़ी स्पष्टता का इंतजार कर रहा है और तब तक शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर शेयर 800 रुपये के आसपास आता है और वहां स्थिरता दिखाता है, तो लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध तरीके से एंट्री पर विचार कर सकते हैं। हालांकि इसके साथ सख्त स्टॉप लॉस रखना जरूरी होगा।
लंबी अवधि की कहानी अभी भी मजबूत?
भले ही शॉर्ट टर्म में विनिवेश की खबर से दबाव बना हो, लेकिन कई बाजार जानकार LIC को अभी भी लंबी अवधि का मजबूत सरकारी वित्तीय प्ले मानते हैं। भारत में बीमा सेक्टर की बढ़ती पहुंच, कंपनी का विशाल ग्राहक आधार और निवेश पोर्टफोलियो इसे लंबी अवधि में मजबूत स्थिति में रखता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार OFS को किस वैल्यूएशन पर लाती है और बाजार उस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
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