Stock Market Crash: 5 घंटे में बदला माहौल, 900 अंक टूटा सेंसेक्स; आखिर बाजार को किस बात ने डरा दिया?

Stock Market Crash: 5 घंटे में बदला माहौल, 900 अंक टूटा सेंसेक्स; आखिर बाजार को किस बात ने डरा दिया?

सुबह तक सबकुछ सामान्य दिख रहा था। निवेशकों को उम्मीद थी कि बाजार पिछले सत्र की कमजोरी से उबरने की कोशिश करेगा। लेकिन कुछ ही घंटों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी भी अहम स्तरों के नीचे पहुंच गया।

सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने अचानक बाजार का मूड बिगाड़ दिया?

दरअसल, इस बार गिरावट की वजह सिर्फ एक नहीं थी। ग्लोबल तनाव, महंगा होता कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आईटी शेयरों में मुनाफावसूली—इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया।

मिडिल ईस्ट से आई चिंता की नई लहर

बाजार की सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत रुकने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। हालात तब और गंभीर हो गए जब क्षेत्र में नए सैन्य हमलों की रिपोर्ट सामने आई।

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते ही निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं और इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

कच्चे तेल ने बढ़ाई मुश्किल

भारत जैसे देश के लिए तेल सिर्फ एक कमोडिटी नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कन है।

तनाव बढ़ने के साथ ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर 97 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि तेल की तेजी ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया।

विदेशी निवेशकों ने बढ़ाया दबाव

बाजार में कमजोरी का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी रही।

पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। जब विदेशी पैसा बाजार से निकलता है तो उसका असर सिर्फ इंडेक्स पर ही नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे पर भी दिखाई देता है।

फिलहाल यही ट्रेंड बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है।

रुपया भी नहीं दे पाया सहारा

तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी फंड आउटफ्लो का असर मुद्रा बाजार में भी दिखा।

डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर खुला, जिससे निवेशकों को यह संकेत मिला कि बाहरी दबाव सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। कमजोर रुपया आमतौर पर आयात आधारित कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है और यही चिंता बाजार में भी दिखाई दी।

IT सेक्टर में मुनाफावसूली

गिरावट का एक अहम कारण आईटी शेयर भी बने।

पिछले कुछ दिनों में आईटी इंडेक्स में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा बुक करना बेहतर समझा। नतीजा यह रहा कि आईटी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली और इसका असर पूरे बाजार पर फैल गया।

अब निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक दो चीजों पर निर्भर करती दिख रही है—मिडिल ईस्ट में तनाव कितना बढ़ता है और विदेशी निवेशकों का रुख कब बदलता है।

अगर कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जाती हैं या वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वहीं, किसी सकारात्मक कूटनीतिक संकेत या विदेशी निवेश की वापसी से सेंटीमेंट तेजी से सुधर भी सकता है।

अभी के लिए बाजार का संदेश साफ है—निवेशक खबरों पर नजर रखें, क्योंकि फिलहाल भावनाएं आंकड़ों से ज्यादा असर दिखा रही हैं।

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Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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