एक समय देश के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाने वाले Anil Ambani की कंपनी Reliance Power ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। तिमाही नतीजों के बाद बाजार में कंपनी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी मुनाफे में थी।
मार्च तिमाही में कंपनी को हुआ बड़ा नुकसान
Reliance Power के मुताबिक मार्च 2026 तिमाही में कंपनी को करीब 494 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने लगभग 125 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। ऐसे में एक साल के भीतर कंपनी की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते खर्च, कमजोर ऑपरेशनल प्रदर्शन और घटते रेवेन्यू का असर कंपनी के नतीजों पर दिखाई दिया है। कंपनी का कुल राजस्व भी पिछले साल के मुकाबले कम हुआ है।
रेवेन्यू में भी आई गिरावट
कंपनी की आय में भी दबाव देखने को मिला। मार्च तिमाही में Reliance Power का रेवेन्यू घटकर लगभग 1,946 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2,065 करोड़ रुपये से ज्यादा था।
अगर पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो कंपनी को सालाना आधार पर भी नुकसान उठाना पड़ा। पूरे साल में कंपनी करीब 337 करोड़ रुपये के घाटे में रही। वहीं इससे पहले वाले वित्त वर्ष में कंपनी ने मजबूत मुनाफा दर्ज किया था।
6000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी
कमजोर नतीजों के बीच कंपनी ने भविष्य की रणनीति पर भी बड़ा ऐलान किया है। Reliance Power का बोर्ड अब 6000 करोड़ रुपये तक का फंड जुटाने की तैयारी कर रहा है। यह रकम Qualified Institutional Placement (QIP), Follow-on Public Offer (FPO) या दोनों के मिश्रण के जरिए जुटाई जा सकती है।
कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपने बिजनेस ऑपरेशंस को मजबूत करने, कर्ज प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं के लिए कर सकती है। बाजार में इस कदम को कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति सुधारने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
डिबेंचर जारी करने को भी मंजूरी
कंपनी के बोर्ड ने 3000 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह डिबेंचर सुरक्षित या असुरक्षित दोनों प्रकार के हो सकते हैं और इन्हें अलग-अलग चरणों में जारी किया जाएगा।
इस फैसले से साफ संकेत मिलते हैं कि कंपनी अपनी फंडिंग क्षमता बढ़ाने और कैश फ्लो मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
बाजार की नजर आगे की रणनीति पर
Reliance Power लंबे समय से कर्ज और वित्तीय चुनौतियों से जूझती रही है। हालांकि कंपनी लगातार नए फंड जुटाने और बिजनेस को स्थिर करने की दिशा में काम कर रही है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी जुटाए गए फंड का इस्तेमाल किस तरह करती है और आने वाले क्वार्टर में प्रदर्शन कितना सुधरता है।
फिलहाल तिमाही नतीजों ने बाजार को मिश्रित संकेत दिए हैं। एक तरफ घाटा बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर बड़े स्तर पर फंड जुटाने की योजना ने निवेशकों की उम्मीदें भी जिंदा रखी हैं।
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