इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की दिग्गज कंपनी G R Infraprojects के शेयरों में मंगलवार को भारी दबाव देखने को मिला। कंपनी के मार्च 2026 तिमाही नतीजे सामने आने के बाद स्टॉक में तेज बिकवाली शुरू हो गई और शेयर करीब 6% तक टूट गया।
कंपनी की कमाई में गिरावट ने बाजार को निराश किया, जबकि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद बढ़ती लागत ने मुनाफे पर बड़ा असर डाला।
मुनाफा लगभग आधा हुआ
कंपनी का चौथी तिमाही का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 49% गिरकर ₹206 करोड़ के आसपास रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹400 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा दर्ज किया था।
दिलचस्प बात यह रही कि कंपनी की आय में बढ़ोतरी देखने को मिली। ऑपरेशंस से रेवेन्यू करीब 10% बढ़ा, लेकिन बढ़ते खर्चों ने पूरा फायदा खत्म कर दिया।
लागत बढ़ने से बिगड़ा पूरा गणित
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कच्चे माल और प्रोजेक्ट से जुड़े खर्चों में तेज उछाल कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया।
मटेरियल कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हुई, जबकि कुछ असाधारण खर्चों ने भी तिमाही नतीजों को प्रभावित किया। यही वजह रही कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद कंपनी का प्रॉफिट बुरी तरह दबाव में आ गया।
बिजनेस मॉडल में दिख रहा बदलाव
कंपनी के बिजनेस पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां BOT और एन्युटी प्रोजेक्ट्स कंपनी की कमाई का अहम हिस्सा थे, वहीं अब EPC प्रोजेक्ट्स का योगदान तेजी से बढ़ रहा है।
हालांकि EPC सेगमेंट में तेजी से ग्रोथ दिख रही है, लेकिन इस बिजनेस में मार्जिन अपेक्षाकृत कम माने जाते हैं। इससे भविष्य में भी प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर दबाव बना रह सकता है।
ऑर्डर बुक अब भी मजबूत
कमजोर तिमाही के बावजूद कंपनी के पास मजबूत ऑर्डर बुक मौजूद है। हाल के महीनों में कंपनी को कई बड़े हाईवे और रेलवे प्रोजेक्ट्स मिले हैं, जिससे अगले कुछ वर्षों के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनी लागत नियंत्रण पर ध्यान देती है, तो लंबे समय में स्थिति बेहतर हो सकती है।
शेयर में क्यों आई इतनी तेज गिरावट?
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता मार्जिन को लेकर दिखाई दी। बाजार को उम्मीद थी कि कंपनी की कमाई ज्यादा मजबूत रहेगी, लेकिन नतीजे उम्मीद से कमजोर निकले।
इसके अलावा बड़ी संख्या में लॉन्ग-टर्म निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के संकेत भी मिले, जिससे शेयर पर और दबाव बढ़ गया।
वैल्यूएशन फिर भी आकर्षक?
दिलचस्प बात यह है कि तेज गिरावट के बाद भी कुछ विश्लेषक इस स्टॉक को पूरी तरह कमजोर नहीं मान रहे। कंपनी का वैल्यूएशन कई इंफ्रा कंपनियों की तुलना में अभी भी आकर्षक दिखाई देता है।
हालांकि जब तक कंपनी मार्जिन स्थिरता नहीं दिखाती, तब तक बड़े संस्थागत निवेशक सतर्क रुख अपना सकते हैं।
निष्कर्ष
G R Infraprojects के ताजा नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ रेवेन्यू ग्रोथ अब बाजार को प्रभावित करने के लिए काफी नहीं है। निवेशकों की नजर अब कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी और लागत नियंत्रण पर ज्यादा है।
मजबूत ऑर्डर बुक कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन आने वाले क्वार्टर्स में मार्जिन सुधार सबसे बड़ा फैक्टर रहेगा। अगर कंपनी खर्चों को नियंत्रित करने में सफल रहती है, तो यह गिरावट भविष्य में रिकवरी का मौका भी बन सकती है।
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