भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन सबसे ज्यादा दबाव एविएशन सेक्टर पर नजर आया। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान स्टॉक 5% से ज्यादा टूट गया, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सिर्फ बाजार की कमजोरी नहीं, बल्कि कई बड़े फैक्टर्स एक साथ काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी की अपील का क्यों पड़ा असर?
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में लोगों से जिम्मेदार खर्च और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से बिना जरूरत विदेशी यात्राएं टालने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाने और घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता देने की बात कही।
विश्लेषकों का कहना है कि इस बयान का असर एयरलाइन कंपनियों की भविष्य की मांग को लेकर निवेशकों की सोच पर पड़ा। खासतौर पर इंटरनेशनल ट्रैवल से अच्छी कमाई करने वाली एयरलाइंस पर दबाव बढ़ गया।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बनीं बड़ी चिंता
एविएशन सेक्टर के लिए सबसे बड़ा खर्च एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF होता है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
तेल महंगा होने का सीधा असर एयरलाइन कंपनियों के ऑपरेटिंग कॉस्ट पर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशकों ने एयरलाइन शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
IndiGo पहले ही बढ़ा चुकी है फ्यूल सरचार्ज
बढ़ती लागत को संभालने के लिए IndiGo पहले ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स में फ्यूल सरचार्ज बढ़ा चुकी है। अब यात्रियों को यात्रा की दूरी के हिसाब से ज्यादा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।
हालांकि इससे कंपनी को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन महंगे टिकट्स की वजह से ट्रैवल डिमांड पर असर पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।
शेयर की चाल ने निवेशकों को किया परेशान
पिछले कुछ महीनों में IndiGo के शेयर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। एक समय यह स्टॉक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई।
मार्केट में बढ़ती अस्थिरता, महंगा ईंधन और ट्रैवल डिमांड को लेकर चिंता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। हालांकि कुछ विश्लेषक अब भी मानते हैं कि लंबी अवधि में भारत का एविएशन सेक्टर मजबूत ग्रोथ दिखा सकता है।
क्या आगे भी दबाव रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक हालात एयरलाइन शेयरों की दिशा तय करेंगे। अगर तेल की कीमतों में और तेजी आती है या विदेशी यात्रा की मांग कमजोर पड़ती है, तो एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बना रह सकता है।
दूसरी तरफ, घरेलू ट्रैवल डिमांड मजबूत बनी रहती है तो बड़ी एयरलाइंस इस मुश्किल दौर को संभाल सकती हैं।
निष्कर्ष
IndiGo के शेयर में आई तेज गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि एविएशन सेक्टर फिलहाल कई चुनौतियों से घिरा हुआ है। महंगा ईंधन, कमजोर सेंटीमेंट और ट्रैवल को लेकर बढ़ती सावधानी ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है।
अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी बढ़ती लागत और बदलते ट्रैवल ट्रेंड्स के बीच अपनी ग्रोथ को कैसे बनाए रखती है।
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